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वर्णनात्मक सांख्यिकी: परिभाषा, प्रमुख माप और गणना का उदाहरण

वर्णनात्मक सांख्यिकी, आँकड़ों को व्यवस्थित करने और उनका सार प्रस्तुत करने वाली सांख्यिकी की शाखा है। इसमें किसी आँकड़ा समूह की मुख्य विशेषताओं को माध्य, मध्यक, बहुलक, परास, प्रसरण और मानक विचलन जैसे मापों से बताया जाता है। हिस्टोग्राम और प्रकीर्ण आरेख जैसे चित्र भी आँकड़ों को समझने में मदद करते हैं।
इस लेख में वर्णनात्मक सांख्यिकी की परिभाषा, उद्देश्य और प्रमुख माप समझाए गए हैं। अंत में एक संख्यात्मक उदाहरण से इनकी गणना देखेंगे।
वर्णनात्मक सांख्यिकी की परिभाषा
वर्णनात्मक सांख्यिकी किसी उपलब्ध आँकड़ा समूह को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करती है। केंद्रीय प्रवृत्ति के माप बताते हैं कि मान किस केंद्र के आसपास हैं, जबकि प्रसार के माप बताते हैं कि वे कितने फैले हुए हैं। सारणी और आरेख भी इस विवरण का हिस्सा हो सकते हैं।
वर्णनात्मक सांख्यिकी का उद्देश्य
इसका उद्देश्य बड़े या जटिल आँकड़ा समूह का ऐसा सार देना है जिसे समझना और तुलना करना आसान हो। इससे रुझान तथा प्रतिरूप पहचाने जा सकते हैं और आगे के विश्लेषण की दिशा मिल सकती है। किसी नमूने से पूरी जनसंख्या के बारे में निष्कर्ष निकालना या औपचारिक रूप से परिकल्पना जाँचना अनुमानात्मक सांख्यिकी का विषय है; केवल वर्णनात्मक सार से ऐसे निष्कर्ष सिद्ध नहीं होते।
वर्णनात्मक सांख्यिकी के प्रमुख माप
केंद्रीय प्रवृत्ति और प्रसार के कुछ सामान्य माप इस प्रकार हैं:
अंकगणितीय माध्य – सभी मानों के योग को उनकी कुल संख्या से भाग देने पर अंकगणितीय माध्य मिलता है। इसे सामान्यतः औसत भी कहते हैं।
मध्यक – आँकड़ों को छोटे से बड़े क्रम में रखने पर बीच में आने वाला मान मध्यक होता है। मानों की संख्या सम होने पर बीच के दो मानों का अंकगणितीय माध्य लिया जाता है।
बहुलक – सबसे अधिक बार आने वाला मान बहुलक होता है। एक से अधिक मान समान अधिकतम आवृत्ति के साथ आ सकते हैं। यदि सभी मान एक ही बार आते हों, तो इस प्रचलित परिभाषा के अनुसार कोई विशिष्ट बहुलक नहीं होता।
परास – सबसे बड़े और सबसे छोटे मान के बीच का अंतर परास कहलाता है।
प्रसरण – प्रसरण, माध्य से मानों की वर्गित दूरियों पर आधारित प्रसार का माप है। पूरी जनसंख्या का प्रसरण निकालते समय वर्गित विचलनों के योग को मानों की संख्या N से भाग देते हैं। जनसंख्या के प्रसरण का अनुमान लगाने वाले सामान्य नमूना प्रसरण में भाजक n − 1 होता है।
मानक विचलन – मानक विचलन प्रसरण का वर्गमूल है। इसकी इकाई मूल आँकड़ों की इकाई के समान होती है, जबकि प्रसरण की इकाई उसका वर्ग होती है।
वर्णनात्मक सांख्यिकी का उदाहरण
मान लीजिए हमारे पास पाँच मान हैं: 1, 3, 5, 7 और 9। पहले इन्हें पूरी जनसंख्या मानकर गणना करते हैं।
माध्य = (1 + 3 + 5 + 7 + 9) ÷ 5 = 25 ÷ 5 = 5।
मान पहले से आरोही क्रम में हैं। बीच का तीसरा मान 5 है, इसलिए मध्यक 5 है।
हर मान केवल एक बार आता है। इसलिए इस उदाहरण में कोई विशिष्ट बहुलक नहीं है; 5 को सबसे अधिक बार आने वाला मान कहना गलत होगा।
परास = 9 − 1 = 8।
माध्य 5 से विचलन −4, −2, 0, 2 और 4 हैं। इनके वर्गों का योग 16 + 4 + 0 + 4 + 16 = 40 है। जनसंख्या प्रसरण = 40 ÷ 5 = 8। यदि इन्हीं मानों को किसी बड़ी जनसंख्या का नमूना माना जाए, तो सामान्य नमूना प्रसरण = 40 ÷ (5 − 1) = 10 होगा।
जनसंख्या मानक विचलन = √8 ≈ 2.83। नमूना प्रसरण 10 लेने पर नमूना मानक विचलन = √10 ≈ 3.16 होगा। प्रसरण और मानक विचलन की गणना में जनसंख्या तथा नमूने के सूत्रों को अलग रखना आवश्यक है।
निष्कर्ष
वर्णनात्मक सांख्यिकी आँकड़ों का उपयोगी सार देती है। माध्य, मध्यक और बहुलक केंद्रीय प्रवृत्ति को बताते हैं; परास, प्रसरण और मानक विचलन प्रसार को मापते हैं। स्थिति और संबद्धता के माप तथा आरेख भी विश्लेषण में उपयोगी हो सकते हैं। उपयुक्त माप और सही गणना चुनने से आँकड़ों में दिखने वाले रुझानों को समझना आसान होता है, लेकिन इससे अपने आप कारण या पूरी जनसंख्या के बारे में निष्कर्ष सिद्ध नहीं होते।












