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टू-फ़ोटॉन माइक्रोस्कोप शोधकर्ताओं को वास्तविक समय में मस्तिष्क गतिविधि की निगरानी करने में सक्षम बनाता है

मस्तिष्क की गतिविधि को मापना तंत्रिका विज्ञान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। न्यूरॉन्स के बीच संचार को समझने के लिए शोधकर्ता कई प्रकार की इमेजिंग तकनीकों का उपयोग करते हैं। दो-फ़ोटॉन प्रतिदीप्ति माइक्रोस्कोपी की एक नई विधि ने चूहे के मस्तिष्क में कोशिकीय स्तर पर तेज़ी से गतिविधि दर्ज करने का प्रदर्शन किया है। यह प्रयोगात्मक तकनीक है, मनुष्य के विचार पढ़ने का उपकरण नहीं।
मस्तिष्क गतिविधि की बेहतर समझ अल्जाइमर जैसे तंत्रिका संबंधी रोगों पर शोध में उपयोगी हो सकती है। वैज्ञानिक यह जानना चाहते हैं कि न्यूरॉन्स अलग-अलग कार्यों के दौरान कैसे सक्रिय होते हैं और एक-दूसरे से कैसे जुड़े होते हैं। कोशिकीय स्तर की इमेजिंग इस बड़े शोध प्रयास का एक साधन है।
शोधकर्ताओं को आशा है कि ऐसे आंकड़े सीखने, स्मृति और निर्णय लेने जैसी प्रक्रियाओं को समझने में मदद करेंगे। इसके लिए उन्होंने तंत्रिका गतिविधि से जुड़े कैल्शियम संकेतों को तेज़ी से दर्ज करने वाला दो-फ़ोटॉन इमेजिंग उपकरण विकसित किया। भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी उपयोग संभव हैं, लेकिन इस अध्ययन ने किसी मानव उपचार की प्रभावशीलता सिद्ध नहीं की।
मस्तिष्क गतिविधि मापने की मौजूदा विधियां
मस्तिष्क गतिविधि का अध्ययन करने के लिए कई विधियां उपलब्ध हैं। प्रत्येक की स्थानिक और समय संबंधी विभेदन क्षमता, लागत और उपयोग की सीमाएं अलग हैं। फ़ंक्शनल मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग (fMRI) और इलेक्ट्रोएन्सेफ़ैलोग्राफी (EEG) मनुष्यों में व्यापक रूप से प्रयुक्त दो विधियां हैं। इन्हें सामान्य रूप से हानिकारक कहना सही नहीं; उपयुक्त परिस्थितियों में दोनों बिना शल्यक्रिया के उपयोग की जाती हैं।
फ़ंक्शनल मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग (fMRI)
fMRI चुंबकीय क्षेत्रों और रेडियो तरंगों का उपयोग करती है। यह आम तौर पर रक्त के ऑक्सीकरण में बदलाव से गतिविधि का अप्रत्यक्ष संकेत प्राप्त करती है। यह मस्तिष्क की विद्युत तरंगों या अलग-अलग न्यूरॉन्स के विद्युत आवेगों की त्रिआयामी तस्वीर नहीं बनाती। इसकी उपयोगिता पूरे मस्तिष्क के क्षेत्रों की गतिविधि का अध्ययन करने में है, जबकि समय संबंधी विभेदन क्षमता की अपनी सीमाएं हैं।
इलेक्ट्रोएन्सेफ़ैलोग्राफी (EEG)
EEG में सिर की त्वचा पर इलेक्ट्रोड रखकर अनेक न्यूरॉन्स की सामूहिक विद्युत गतिविधि दर्ज की जाती है। यह तेज़ बदलावों को माप सकती है, लेकिन संकेतों का सटीक स्रोत निर्धारित करना कठिन हो सकता है। Richard Caton ने 1875 में खरगोश और बंदर के मस्तिष्क से विद्युत गतिविधि दर्ज की थी; मूल पाठ में दिया गया 1975 गलत था।
इसके बाद EEG तकनीक लगातार विकसित हुई और आज भी चिकित्सा तथा शोध में इस्तेमाल होती है। मस्तिष्क-कंप्यूटर इंटरफ़ेस में भी इसका उपयोग हुआ है। यह नई दो-फ़ोटॉन तकनीक से अलग प्रकार की जानकारी देती है; दोनों को एक-दूसरे का सीधा विकल्प नहीं समझना चाहिए।
अध्ययन
अध्ययन “High-speed two-photon microscopy with adaptive line-excitation” 2024 में Optica में प्रकाशित हुआ। इसमें अनुकूलित रेखीय उत्तेजन वाली दो-फ़ोटॉन माइक्रोस्कोपी का वर्णन है, जिससे चूहे के मस्तिष्क में कोशिकीय स्तर पर तंत्रिका गतिविधि से जुड़े संकेत तेज़ी से दर्ज किए गए।
दो-फ़ोटॉन प्रतिदीप्ति माइक्रोस्कोप
दो-फ़ोटॉन प्रतिदीप्ति माइक्रोस्कोपी ऊतक के भीतर मौजूद प्रकाश उत्सर्जित करने वाले संकेतकों की इमेजिंग कर सकती है। नई विधि नमूने में चुने हुए न्यूरॉन कोशिका-शरीरों के अनुसार प्रकाश का पैटर्न बनाती है। इस अध्ययन का प्रदर्शन मुख्य रूप से एक तल में तेज़ कैल्शियम इमेजिंग का था, पूरे मस्तिष्क के गतिशील त्रिआयामी मानचित्र का नहीं।
अनुकूली सैंपलिंग रणनीति
इस विधि में हर पिक्सेल को समान रूप से स्कैन करने के बजाय रुचि वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है। पहले उच्च विभेदन क्षमता वाली छवि से न्यूरॉन कोशिका-शरीरों की पहचान की जाती है। फिर छोटी प्रकाश रेखा का पैटर्न उन्हीं क्षेत्रों के अनुसार बदला जाता है, जिससे अनावश्यक पृष्ठभूमि पर प्रकाश कम पड़ता है।
पॉइंट स्कैनिंग
पारंपरिक बिंदु स्कैनिंग में केंद्रित प्रकाश बिंदु नमूने पर क्रमशः चलता है। नया उपकरण प्रारंभिक अंशांकन के लिए इसी के समतुल्य उच्च विभेदन क्षमता वाली रिकॉर्डिंग करता है। उस रिकॉर्डिंग से चुने हुए क्षेत्रों की स्थिति प्राप्त होती है, जिनका उपयोग बाद की तेज़ रेखीय स्कैनिंग को निर्देशित करने में किया जाता है।
रेखीय प्रकाश उत्तेजन
उपकरण नमूने पर प्रकाश की एक छोटी रेखा डालता है। रेखा के पैटर्न को इस तरह नियंत्रित किया जाता है कि मुख्यतः चुने हुए न्यूरॉन कोशिका-शरीर उत्तेजित हों। एक माप में अपेक्षाकृत बड़ा भाग दर्ज होने से प्रति फ़्रेम आवश्यक मापों की संख्या घटती है। इससे गति बढ़ती है; यह पूरे मस्तिष्क में सभी संकेतों का आरंभ से अंत तक पता लगाने का दावा नहीं है।
दो-फ़ोटॉन माइक्रोस्कोप का परीक्षण
शोधकर्ताओं ने चूहे के मस्तिष्क के कॉर्टेक्स में कैल्शियम संकेतों की इमेजिंग की। प्रदर्शित विन्यास में फ़्रेम दर 198 हर्ट्ज़ तक पहुंची। कैल्शियम संकेत न्यूरॉन गतिविधि के अप्रत्यक्ष सूचक हैं; यह संख्या मस्तिष्क की सभी विद्युत घटनाओं को सीधे मापने की दर नहीं है।
डिजिटल माइक्रोमिरर डिवाइस (DMD)
डिजिटल माइक्रोमिरर डिवाइस (DMD) के सूक्ष्म दर्पण प्रकाश के पैटर्न को नियंत्रित करते हैं। यहां DMD पर अंशांकन से प्राप्त न्यूरॉन कोशिका-शरीरों का मास्क लगाया गया था, ताकि चुने हुए क्षेत्रों पर प्रकाश पड़े और पृष्ठभूमि पर कम। यह प्रणाली हर क्षण न्यूरॉन की गतिविधि पढ़कर अपने दर्पण स्वतः चालू-बंद करने का प्रदर्शन नहीं थी।

स्रोत – Molly M Bechtel, University of California, Davis
दो-फ़ोटॉन प्रतिदीप्ति माइक्रोस्कोप के परीक्षण परिणाम
प्रयोग ने दिखाया कि छोटी प्रकाश रेखा और अनुकूली सैंपलिंग का संयोजन कोशिकीय स्तर पर तेज़ कैल्शियम इमेजिंग कर सकता है। चुने हुए क्षेत्रों पर ध्यान देने से ऊतक पर पड़ने वाली औसत लेज़र शक्ति और दर्ज आंकड़ों की मात्रा कम हुई।
अलग-अलग न्यूरॉन्स के संकेतों को निकालने के लिए कम्प्यूटेशनल प्रसंस्करण भी आवश्यक था। पास-पास या एक-दूसरे पर आच्छादित संकेतों को अलग करने की सीमाएं बनी रहती हैं। यह तंत्रिका विज्ञान के लिए उपयोगी शोध उपकरण है, मस्तिष्क की संपूर्ण कार्यप्रणाली को समझ लेने का प्रमाण नहीं।
लाभ
तेज़ इमेजिंग वैज्ञानिकों को एक ही समयावधि में अधिक तंत्रिका गतिविधि दर्ज करने में मदद कर सकती है। इससे कोशिकाओं की कार्यात्मक व्यवस्था और उनकी गतिविधि के बीच संबंधों पर शोध आसान हो सकता है। इन संभावनाओं को तत्काल उपलब्ध व्यावसायिक या नैदानिक लाभ नहीं समझना चाहिए।
न्यूरोलॉजिकल रोगों का उपचार
अल्जाइमर और पार्किन्सन जैसे रोगों में तंत्रिका गतिविधि कैसे बदलती है, यह एक महत्वपूर्ण शोध विषय है। मूल पाठ ने मृत्यु के आंकड़ों को भविष्य में रोग से प्रभावित लोगों की संख्या के अनुमान के साथ मिला दिया था। ऐसे अलग मापों को एक ही बढ़ती मृत्यु संख्या के रूप में प्रस्तुत करना गलत है।
स्वस्थ और रोगग्रस्त मस्तिष्क के बीच अंतर समझना उपचार संबंधी परिकल्पनाएं बनाने में सहायक हो सकता है। लेकिन इस माइक्रोस्कोप अध्ययन ने रोग का इलाज, मानव मस्तिष्क की सामान्य कार्यप्रणाली की बहाली या किसी दवा का लाभ सिद्ध नहीं किया।
सीखना
सीखने और स्मृति के दौरान न्यूरॉन समूहों की गतिविधि मापना बुनियादी शोध में उपयोगी है। इससे वैज्ञानिक स्मृतियों के निर्माण और पुनःस्मरण से जुड़े प्रश्नों का अध्ययन कर सकते हैं। सीधे इन आंकड़ों के आधार पर विद्यालयों के पाठ्यक्रम बदल देना फिलहाल एक अनुमान है, इस अध्ययन का प्रमाणित परिणाम नहीं।
तेज़ इमेजिंग
अध्ययन में पारंपरिक बिंदु-स्कैनिंग दो-फ़ोटॉन माइक्रोस्कोपी की तुलना में लगभग पांच से दस गुना अधिक इमेजिंग गति दिखाई गई। तुलना विशेष प्रयोगात्मक विन्यास की है। इससे तेज़ कैल्शियम बदलाव दर्ज करना संभव हुआ, लेकिन इसे सभी मानसिक प्रक्रियाओं या मानव विचारों का सीधा मापन नहीं कहना चाहिए।
ऊतक पर कम प्रकाश भार
रुचि वाले क्षेत्रों को चुनकर प्रकाशित करने से मस्तिष्क ऊतक पर औसत लेज़र शक्ति घटती है। इससे गर्म होने और प्रकाश से होने वाली क्षति का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। अध्ययन चूहों में किया गया था; इसे मानव रोगियों के लिए सिद्ध सुरक्षा या पूर्णतः जोखिमरहित प्रक्रिया नहीं कहा जा सकता।
कम लेज़र शक्ति की आवश्यकता
अध्ययन में ऊतक पर पड़ने वाली लेज़र शक्ति दस गुने से अधिक कम की गई। यह उपकरण की पूरी लागत या कुल पर्यावरणीय प्रभाव में उसी अनुपात की कमी का प्रमाण नहीं है। व्यावहारिक लागत प्रकाशिकी, लेज़र, नियंत्रण प्रणाली और रखरखाव पर भी निर्भर करेगी।
अन्य तकनीकों के साथ संयोजन की संभावना
इस सैंपलिंग रणनीति को बीम मल्टीप्लेक्सिंग जैसी विधियों के साथ मिलाने की संभावना है। रिमोट फ़ोकसिंग के साथ संयोजन भी त्रिआयामी इमेजिंग की दिशा में उपयोगी हो सकता है। ये आगे के विकास के अवसर हैं; यहां पूरे मस्तिष्क की वास्तविक समय में त्रिआयामी इमेजिंग प्रदर्शित नहीं की गई थी।
शोधकर्ता
यह अध्ययन University of California, Davis में हुआ। लेखक Yunyang Li, Shu Guo, Ben Mattison, Junjie Hu, Kwun Nok Mimi Man और Weijian Yang हैं। सहायता देने वाले संगठनों में Burroughs Wellcome Fund, National Science Foundation, National Institute of Neurological Disorders and Stroke तथा National Eye Institute शामिल थे।
संबंधित क्षेत्रों में काम करने वाली दो कंपनियां
तंत्रिका विज्ञान, दवा विकास और मस्तिष्क से प्रेरित कम्प्यूटिंग में बेहतर शोध उपकरण उपयोगी हो सकते हैं। नीचे दी गई कंपनियां इन व्यापक क्षेत्रों से जुड़ी हैं। अध्ययन ने इन कंपनियों द्वारा इस विशेष माइक्रोस्कोप को अपनाने, निकट भविष्य में उसका व्यावसायीकरण करने या उससे आय प्राप्त करने की घोषणा नहीं की।
1. BrainChip Holdings Ltd
BrainChip Holdings Ltd (BRN.AX ) ऑस्ट्रेलिया की एक न्यूरोमॉर्फिक कम्प्यूटिंग कंपनी है। यह मस्तिष्क से प्रेरित कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग के लिए तकनीक विकसित करती है। Peter van der Made कंपनी के संस्थापक हैं। इसे केवल मस्तिष्क नेटवर्क का सॉफ़्टवेयर सिम्युलेटर कहना इसके व्यवसाय का अधूरा वर्णन है।
BrainChip की Akida तकनीक कम शक्ति वाले उपकरणों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से जुड़ी है। इसके विकास उपकरण डेवलपरों को न्यूरल नेटवर्क तैयार करने और उनका परीक्षण करने में मदद करते हैं। यह तकनीक शोध में प्रयुक्त दो-फ़ोटॉन माइक्रोस्कोप से अलग है।
न्यूरोमॉर्फिक कम्प्यूटिंग में व्यावसायिक अवसरों के साथ तकनीकी और वित्तीय जोखिम भी हैं। किसी शोध उपलब्धि के आधार पर BrainChip के शेयर में तेज़ी या निवेशक रुचि बढ़ने को निश्चित नहीं माना जा सकता। इस लेख में दोनों के बीच प्रत्यक्ष व्यावसायिक संबंध का प्रमाण नहीं दिया गया है।
2. Biogen
Biogen एक जैवप्रौद्योगिकी कंपनी है जो तंत्रिका संबंधी और अन्य गंभीर रोगों की दवाओं पर काम करती है। अल्जाइमर उपचार Leqembi को इसने Eisai के साथ विकसित किया।
FDA ने Leqembi को जनवरी 2023 में त्वरित अनुमोदन दिया और पुष्टिकरण अध्ययन से नैदानिक लाभ मिलने के बाद जुलाई 2023 में पारंपरिक अनुमोदन में बदला। इसे केवल “फ़ास्ट-ट्रैक अनुमोदन” कहना सटीक नहीं है। उपचार का उपयोग निर्धारित शुरुआती रोग अवस्थाओं में किया जाता है और इसके गंभीर जोखिमों की निगरानी आवश्यक है। मूल पाठ में उपयोग लगभग तीन गुना होने का दावा स्पष्ट अवधि और स्रोत के बिना दिया गया था। इस माइक्रोस्कोप अध्ययन से दवा की बिक्री या Biogen के शेयर का प्रदर्शन सिद्ध नहीं होता।
दो-फ़ोटॉन माइक्रोस्कोपी की आगे की संभावनाएं
यह शोध चूहे के मस्तिष्क में कोशिकीय स्तर पर तंत्रिका गतिविधि की तेज़ इमेजिंग के लिए एक उपयोगी विधि प्रस्तुत करता है। अनुकूली प्रकाश उत्तेजन से गति और ऊतक पर प्रकाश भार के बीच संतुलन बेहतर किया जा सकता है। आगे के अध्ययन इसकी उपयोगिता और सीमाएं स्पष्ट करेंगे; मानव विचारों से आसपास की वस्तुएं नियंत्रित करना या तंत्रिका रोगों का उपचार इस प्रयोग का प्रदर्शित परिणाम नहीं था।
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