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Tezos का Kathmandu उन्नयन: सितंबर 2022 में हुए बदलाव

Tezos (XTZ) को प्रोटोकॉल में औपचारिक संशोधन करने की व्यवस्था और प्रूफ-ऑफ-स्टेक मॉडल के लिए जाना जाता है। सितंबर 2022 में नेटवर्क का ग्यारहवाँ प्रमुख उन्नयन, Kathmandu, सक्रिय हुआ। यह Tezos के विकास का एक ऐतिहासिक चरण था, न कि आज का नवीनतम संस्करण। ऊर्जा-दक्षता का दावा भी नेटवर्क के पूरे जीवनचक्र में शून्य ऊर्जा उपयोग का अर्थ नहीं है।
https://twitter.com/tezos/status/1573415873129463824
Kathmandu में क्या बदला?
Kathmandu ने शहरों के नाम पर प्रोटोकॉल संस्करणों का नाम रखने की परंपरा जारी रखी। यह क्रम प्रोटोकॉल 004 के Athens से शुरू हुआ था। इसके बाद Babylon, Carthage, Delphi, Edo, Florence, Granada, Hangzhou, Ithaca और Jakarta आए। Kathmandu उस समय का अगला चरण था; बाद में भी प्रोटोकॉल में बदलाव जारी रहे। इन सभी नामों को केवल प्राचीन शहरों की श्रेणी में रखना सही नहीं है।
तकनीकी बदलावों में नया प्रोटोकॉल वातावरण V6, लेनदेन सत्यापन को चरणों में बाँटने का काम, अनुबंधों के इवेंट दर्ज करने की सुविधा और सत्यापन योग्य विलंब फलनों (VDF) से बेहतर यादृच्छिकता शामिल थी। रिलीज़ नोट में स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट ऑप्टिमिस्टिक रोलअप और डेटा उपलब्धता परत के लिए जारी विकास कार्य भी था; इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि ये दोनों सुविधाएँ Kathmandu के साथ मुख्य नेटवर्क पर पूरी तरह शुरू हो गई थीं। Smart Rollups का मुख्य नेटवर्क सक्रियण बाद में मार्च 2023 के Mumbai उन्नयन में हुआ। अन्य मदों में असंगत बदलाव, ऑपरेशन की रसीदों और RPC में परिवर्तन, बग सुधार, round_overflow के एन्कोडिंग नाम का सुधार तथा नेटवर्क आरंभ के समय implicit accounts को डेलीगेट करने की अनुमति शामिल थी। “Invoice” का संदर्भ यहाँ सामान्य ग्राहक बिलिंग सुविधा नहीं, प्रोटोकॉल में शामिल योगदान के लिए 3,000 tez के भुगतान से था।
मूल रिपोर्ट में Tezos की सह-संस्थापक कैथलीन ब्राइटमैन ने नेटवर्क की संशोधन व्यवस्था की प्रशंसा की थी। उनका आशय था कि समुदाय स्वीकृत बदलावों को समन्वित तरीके से अपना सकता है और हर उन्नयन के लिए प्रतिस्पर्धी शाखा बनाना आवश्यक नहीं होता। इससे समन्वय की कठिनाइयाँ घट सकती हैं; फिर भी सभी प्रकार के नेटवर्क विभाजन या तकनीकी त्रुटियों का जोखिम समाप्त नहीं होता।
Tezos की संशोधन व्यवस्था की भूमिका
Tezos को शुरू से बदलाव स्वीकार करने की औपचारिक व्यवस्था के साथ बनाया गया था। प्रस्ताव, परीक्षण, मतदान और सक्रियण जैसी प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक रहता है; डेवलपर मनचाहा बदलाव अपने-आप लागू नहीं कर देते। मूल रिपोर्ट के अनुसार ब्राइटमैन ने उस समय तक सहमति प्रणाली में दो बड़े बदलावों और अन्य स्केलिंग सुधारों का उल्लेख किया था। इसे उनकी ऐतिहासिक टिप्पणी के रूप में समझना चाहिए, न कि बिना जोखिम असीमित बदलाव करने की क्षमता के रूप में। उन्होंने Ethereum सहित अन्य नेटवर्कों के सामने भी क्षमता बढ़ाने की चुनौती होने की बात कही थी।
उनकी दलील थी कि उपलब्ध क्षमता की तुलना में माँग बढ़ने पर भीड़ और शुल्क बढ़ सकते हैं। यह हर नेटवर्क और हर समय समान रूप से लागू होने वाला निष्कर्ष नहीं है। वास्तविक लागत, संसाधनों, नेटवर्क गतिविधि और इस्तेमाल किए गए अनुप्रयोग या स्केलिंग समाधान पर निर्भर करती है।
Kathmandu को अधिक उपयोगकर्ताओं के लिए आधार तैयार करने वाले तकनीकी कदम के रूप में पेश किया गया था। सत्यापन, यादृच्छिकता और डेवलपर उपकरणों में सुधार उपयोगी थे, लेकिन उन्नयन अपने-आप असीमित लेनदेन क्षमता या हर स्थिति में बहुत कम शुल्क की गारंटी नहीं देता। उस समय तैयार की जा रही सुविधाओं और बाद में सक्रिय हुई क्षमताओं में अंतर रखना आवश्यक है।
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