रोबोटिक्स
उन्नत प्रॉस्थेटिक हाथ रोबोटिक्स में मानव स्पर्श की नकल करता है: एक बड़ी उपलब्धि

शोधकर्ताओं ने एक प्रयोगात्मक रोबोटिक हाथ बनाया है जिसमें मुलायम जोड़, कठोर अंदरूनी ढाँचा और स्पर्श मापने वाले सेंसर साथ काम करते हैं। इसका उद्देश्य भविष्य में कृत्रिम हाथों की पकड़ बेहतर बनाना है। इस अध्ययन में अंग-विच्छेदन से प्रभावित व्यक्तियों पर चिकित्सकीय परीक्षण नहीं हुआ और यह सिद्ध नहीं हुआ कि किसी उपयोगकर्ता को नसों के माध्यम से स्पर्श का एहसास वापस मिल गया।
मनुष्य जैसी पकड़ बनाना कठिन क्यों है?
हमारे हाथ की हड्डियाँ, मांसपेशियाँ, मुलायम ऊतक और त्वचा के अलग-अलग स्पर्श ग्रहणकर्ता मिलकर काम करते हैं। इसलिए हम नाज़ुक वस्तु बिना कुचले पकड़ सकते हैं और दबाव या कंपन में बदलाव महसूस कर सकते हैं। कठोर रोबोटिक पकड़ मज़बूत हो सकती है, लेकिन आकार के अनुसार ढलना कठिन होता है। बहुत मुलायम पकड़ वस्तु के आकार के अनुसार ढलती है, पर शक्ति और स्पर्श संबंधी जानकारी सीमित हो सकती है।
मानव त्वचा में मर्केल, मैस्नर, रूफिनी और पैसिनी से जुड़े ग्रहणकर्ता दबाव, खिंचाव और कंपन के विभिन्न पहलुओं पर प्रतिक्रिया करते हैं। शोधकर्ताओं ने पूरे जैविक तंत्र की नकल नहीं की। उन्होंने कई परतों वाला सेंसर बनाया जो एक साधारण स्पर्श स्विच से अधिक जानकारी दर्ज कर सकता है।
प्रयोगात्मक हाथ की बनावट
Science Advances में प्रकाशित अध्ययन में सिलिकॉन के लचीले जोड़ और कठोर अंदरूनी ढाँचे वाले उँगलियों का वर्णन है। हवा का दबाव मुलायम जोड़ों को चलाता है। इससे उँगलियाँ वस्तु के आकार के अनुसार ढलती हैं, जबकि ढाँचा पकड़ को सहारा देता है।
उँगली के सिरे पर सेंसरों की तीन परतें हैं। बाहरी और बीच वाली परत में दबाव पड़ने पर विद्युत प्रतिरोध बदलता है। अंदर की परत में तेज़ बदलाव और कंपन दर्ज करने के लिए पीज़ोइलेक्ट्रिक तत्व है। कंप्यूटर मॉडल इन संकेतों को जोड़कर सतह की बनावट की पहचान करता है।
अध्ययन में संकेतों का न्यूरोमॉर्फिक कूटन किया गया, यानी उन्हें ऐसी गणनात्मक शैली में बदला गया जो तंत्रिका संकेतों की कुछ विशेषताओं से प्रेरित है। इस प्रयोग में ये संकेत किसी व्यक्ति की नसों तक पहुँचाकर वास्तविक स्पर्श संवेदना वापस नहीं दिलाई गई।
परीक्षण में क्या मिला?
दल ने पहले उँगलियों और सेंसर परतों को अलग-अलग परखा, फिर हाथ को UR5 रोबोटिक भुजा से जोड़कर रोज़मर्रा की वस्तुएँ पकड़वाईं। इनमें अलग-अलग आकार और कठोरता वाले सामान तथा पानी से भरा कागज़ का कप शामिल था। लचीली बनावट ने पकड़ को वस्तु के अनुरूप ढालने में मदद की।
बहुपरतीय सेंसर वाली एक प्रयोगात्मक उँगली ने 26 परीक्षण सतहों की बनावट वर्गीकृत करने में अध्ययन की विधि के अनुसार औसतन 98.38% सटीकता प्राप्त की। यह दुनिया की किसी भी वस्तु को पहचानने की सामान्य सटीकता नहीं है और न ही किसी रोगी की अनुभूत स्पर्श संवेदना का माप है। उसी विशिष्ट परीक्षण में तुलना के लिए इस्तेमाल की गई पूरी तरह मुलायम और कठोर उँगलियों का प्रदर्शन कम था।
संभावित उपयोग और सीमाएँ
यह डिज़ाइन भविष्य के कृत्रिम हाथों, नाज़ुक सामान सँभालने वाले औद्योगिक ग्रिपर और फसल चुनने वाले रोबोटों के लिए उपयोगी हो सकता है। दैनिक उपयोग का कृत्रिम हाथ बनाने से पहले आराम, टिकाऊपन, नियंत्रण, वजन, ऊर्जा, सुरक्षा और मनुष्यों में वास्तविक संवेदी प्रतिक्रिया का परीक्षण करना होगा।
पहले लेख में दिया गया पाँच से दस वर्ष में बाज़ार में उपलब्ध होने का निश्चित अनुमान अध्ययन से सिद्ध नहीं होता। विकास में कितना समय लगेगा, यह आगे के शोध, चिकित्सकीय परीक्षण और आवश्यक स्वीकृतियों पर निर्भर करेगा।
उद्योग और निवेश
Ekso Bionics पहनने योग्य एक्सोस्केलेटन और पुनर्वास रोबोटिक्स पर काम करती है। इस शैक्षणिक अध्ययन का अर्थ यह नहीं है कि कंपनी ने यही सेंसर अपने उत्पादों में लगाया है या इससे उसकी आय निश्चित रूप से बढ़ेगी। निवेश का मूल्यांकन वास्तविक उत्पादों, वित्तीय विवरण और जोखिमों के आधार पर करना चाहिए।
निष्कर्ष
यह प्रयोग दिखाता है कि मुलायम और कठोर सामग्री को बहुपरतीय सेंसर के साथ मिलाने से प्रयोगशाला में पकड़ और सतह पहचान बेहतर हो सकती है। यह कृत्रिम हाथों के अनुसंधान में एक कदम है, मानव स्पर्श संवेदना लौटाने वाला तैयार उत्पाद नहीं।












